मानव विकास NCERT Solutions for Class 12 Geography India – यहाँ पर नीचे कक्षा ’12’ के ‘भूगोल’  एनसीईआरटी पुस्तक के तीसरे अध्याय ‘मानव विकास’ के सभी प्रश्न व उनके उत्तर दिए जा रहे हैं। यह सभी प्रश्न व उत्तर (PDF Form) में भी उपलब्ध हैं।

मानव विकास NCERT Solutions for Class 12 Geography India: People and Economy Chapter 3 Human Development  (Hindi Medium)

CHAPTER 3: मानव विकास (TEXTBOOK SOLUTIONS);

Page 30:

प्रश्न 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए:

  1. मानव विकास सूचकांक (2005) के सन्दर्भ में विश्व के देशों में भारत की निम्नलिखित में से कौन-सी कोटि थी?

  1. 126
  2. 127
  3. 128
  4. 129

उत्तर: (2) 127

Page 31:

2. मानव विकास सूचकांक में भारत के निम्नलिखित राज्यों में किस एक की कोटि उच्चतम है?

  1. तमिलनाडु
  2. पंजाब
  3. केरल
  4. हरियाणा

उत्तर: (3) केरल

3. भारत के निम्नलिखित राज्यों में से किस एक में स्त्री साक्षरता निम्नतम है?

  1. जम्मू और कश्मीर
  2. अरुणाचल प्रदेश
  3. झारखण्ड
  4. बिहार

उत्तर: (4) बिहार

4. भारत के निम्नलिखित राज्यों में से किस एक में 0-6 आयु वर्ग में बच्चों में लिंग अनुपात निम्नतम है?

  1. गुजरात
  2. हरियाणा
  3. पंजाब
  4. हिमाचल प्रदेश

उत्तर: (2) हरियाणा

5. भारत के निम्नलिखित केंद्र-शासित प्रदेशों में से किस एक की साक्षरता दर उच्चतम है?

  1. लक्षद्वीप
  2. चंडीगढ़
  3. दमन और दीव
  4. अंडमान और निकोबार द्वीप

उत्तर: (2) चंडीगढ़

प्रश्न 2. निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें

1. मानव विकास को परिभाषित कीजिए।

उत्तर: ”मानव विकास, स्वस्थ्य भौतिक पर्यावरण से लेकर आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक स्वतत्रंता तक सभी प्रकार के मानव विकल्पों को सम्मिलित करते हुए लोगों के विकल्पों में विस्तार और उनके शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा सशक्तीकरण के अवसरों में वृद्धि की प्रक्रिया है।”

2. उत्तरी भारत के अधिकांश राज्यों में मानव विकास के निम्न स्तरों के दो कारण बताइए।

उत्तर: मानव विकास के निम्न स्तरों के दो कारण निम्नलिखित हैं:

  1. गरीबी: उत्तरी भारत के बिहार तथा उड़ीसा जैसे राज्यों में लगभग 40 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या गरीबी की रेखा से नीचे जी रही है; जबकि मध्य प्रदेश, सिक्किम, असम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों की 30 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या गरीबी की रेखा के नीचे है।
  2. रोज़गार की कमी: इन क्षेत्रों में शिक्षित युवाओं के रोजगार की दर 25 प्रतिशत है जो अन्य राज्यों की अपेक्षा बहुत कम हैं। यहाँ शिक्षित युवा भी छोटे कामों में लग जाते हैं जो निम्न स्तर का सूचक हैं।

3. भारत के बच्चों में घटते लिंगानुपात के दो कारण बताइए।

उत्तर: भारत के बच्चों में घटते लिंगानुपात के दो कारण निम्नलिखित हैं: 

  1. आधुनिक चिकित्सा पद्धत्ति की मौजदूगी जैसे ‘अल्ट्रासाउंड’ इत्यादि की मदद से पहले ही लिंग का पता लग जाने के कारण पितृसतात्मक सोच के लोग ‘भ्रूण हत्या’ जैसे कदम उठाते हैं।
  2. भारत शुरू से ही एक पुरुष प्रधान देश रहा हैं। यहाँ पर पुरुषों को हमेशा से ही महिलाओं से उच्चा स्थान दिया जाता हैं। आज भी अनेकों स्थानों पर महिलाओं को पुरषों के समान अधिकार प्राप्त नहीं हैं, यह भी घटते लिंग अनुपात का एक मुख्य कारण रहा हैं।

प्रश्न 3. निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर लगभग 150 शब्दों में दें

1. भारत में 2001 के स्त्री साक्षरता के स्थानिक प्रारूपों की विवेचना कीजिए और इसके लिए उत्तरदायी कारणों को समझाइए।

उत्तर: स्थानिक प्रारूपों की विवेचना:

  1. भारत में स्त्रियों की साक्षरता दर कुछ क्षेत्रों में उच्च है तो कुछ में निम्न है। देश के सभी राज्यों/केंद्र प्रशासित राज्यों में केरल सबसे आगे आता हैं। पुरुष तथा स्त्री साक्षरता की दृष्टि से भी केरल का प्रथम स्थान है।
  2. इस राज्य में पुरुष तथा स्त्री की साक्षरता दर क्रमश: 94.20 तथा 87.86 प्रतिशत है। मिजोरम तथा लक्षद्वीप भी केरल से कोई अधिक पीछे नहीं हैं। इनका क्रमशः द्वितीय तथा तृतीय स्थान है और यहाँ पर क्रमश: 88.49 तथा 87.52 प्रतिशत लोग साक्षर हैं।
  3. सबसे कम साक्षरता बिहार में पाई जाती हैं। यहाँ कुल साक्षरता, पुरुषों की साक्षरता तथा स्त्रियों की साक्षरता, तीनों ही समस्त भारत में न्यूनतम हैं। वास्तव में बिहार ही एक ऐसा राज्य हैं, जहाँ आधी से कम जनसंख्या साक्षर है। यहाँ पर कुल साक्षरता दर 47.53 प्रतिशत हैं और पुरुषों तथा स्त्रियों की साक्षरता दर क्रमश: 60.32 तथा 33.57 प्रतिशत है। अर्थात् यहाँ पर लगभग एक-तिहाई स्त्रियाँ ही साक्षर हैं और शेष दो-तिहाई स्त्रियाँ निरक्षर हैं।
  4. कम साक्षरता वाले अन्य राज्य झारखंड, जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश हैं। इन सभी राज्यों में साक्षरता दर 60 प्रतिशत से कम है। कुल मिलाकर 13 राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों में साक्षरता दर 65.38 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत से कम है।
  5. इस वर्ग के राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश, उत्तर में जम्मू-कश्मीर, पश्चिम में राजस्थान तथा दादरा एवं नगर हवेली, दक्षिण में आंध्र प्रदेश, मध्य में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश तथा छत्तीसगढ़, पूर्व में बिहार, झारखंड व ओडिशा तथा उत्तर-पूर्व अरुणाचल प्रदेश, असम एवं मेघालय हैं।
  6. जिन राज्यों में कुल पुरुष तथा स्त्री, तीनों प्रकार की साक्षरता दर, राष्ट्रीय साक्षरता दर से कम है, उनके नाम अरुणाचल प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश, दादरा व नगर हवेली, जम्मू-कश्मीर, झारखण्ड तथा उत्तर प्रदेश हैं।

उत्तरदायी कारण:

  1. वे क्षेत्र जो विकास की दृष्टि से पिछड़े हुए हैं, वहाँ स्त्रियों की शिक्षा की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता था। उदहारण के लिए:- झारखण्ड, उड़ीसा, बिहार, इत्यादि।
  2. अनुसूचित जातियों अथवा अनुसूचित जनजातियों के वर्ग इतने पिछड़े हुए हैं कि इनमें स्त्री साक्षरता दर ने के बराबर हैं।
  3. ग्रामीण क्षेत्रों में स्त्रियों को घर के कामों तक ही सीमित रखा जाता हैं।

2. भारत के 15 प्रमुख राज्यों में मानव विकास के स्तरों में किन कारकों ने स्थानिक भिन्नता उत्पन्न की है?

उत्तर: 

  1. भारत में मानव विकास को प्रभावित करने में सामाजिक-राजनीतिक, आर्थिक और ऐतहासिक कारण उत्तरदायी हैं। केरल के मानव विकास सूचकांक का उच्चतम मूल्य इसके द्वारा 2001 में शत- प्रतिशत के आसपास (90.92 प्रतिशत) साक्षरता दर को प्राप्त करने के लिए किए गए प्रभावी कार्यशीलता के कारण है।
  2. शैक्षिक उपलब्धियों के अतिरिक्त आर्थिक विकास भी मानव विकास सूचकांक पर सार्थक प्रभाव डालता है। आर्थिक दृष्टि से विकसित महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पंजाब एवं हरियाणा जैसे राज्यों के मानव विकास सूचकांक का मूल्य असम, बिहार, मध्य प्रदेश इत्यादि राज्यों की तुलना में ऊँचा है।
  3. ऐतहासिक कारण भी मानव-विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उपनिवेश काल में विकसित प्रादेशिक विकृतियाँ और सामाजिक विषमताएँ अब भी भारत की अर्थव्यवस्था, राजतंत्र और समाज में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
  4. इसके अतिरिक्त सामाजिक-राजनीतिक क्षेत्रों में भी भारत ने महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं, परन्तु ये अभी वांछित स्तर से काफी नीचे हैं। सामाजिक वितरण न्याय के अपने मुख्य ध्येय के साथ भारत सरकार ने नियोजित विकास के माध्यम से संतुलित विकास के लिए अनेक प्रयास किए हैं।